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‘रेरा’ के राज में ग्राहक होगा रियल एस्टेट किंग, बिल्डर की लगेगी क्लास, ये हैं 10 फायदे

अब मकान बुक कराने के बाद बिल्डरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. उल्टा अब क्लास लगने की बारी बिल्डरों की है. आज से रीयल एस्टेट रेग्यूलेशन एंड डेवलपमेंट (रेरा) एक्ट लागू हो गया है.

कानून मार्च, 2016 में संसद में पारित किया गया था. नए कानून में बॉयर्स का विशेष ध्यान रखा गया है. अगर आपने किसी बिल्डर प्रोजेक्ट में घर बुक कराया है और बिल्डर आपको अभी तक घर बना कर नहीं दे रहा है, तो इस तरह के मामलों में भी रेरा आपकी मदद करेगा, क्योंकि ऐसे सभी मामले में अब रेरा के दायरे में होंगे.

रेरा को लागू करने की अधिसूचना अभी तक सिर्फ 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ही जारी की है. इसके लागू होने से हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बढ़ेगी. शहरी आवास मंत्री वेंकैया नायडू ने नए कानून को रीयल एस्टेट के क्षेत्र में नई जान फूंकने वाला करार दिया.

उन्होंने कहा है कि नया कानून बिल्डरों के गले पर फंदा नहीं है बल्कि इससे जो बदलाव आएगा उससे बिल्डरों को ज्यादा खरीदार मिलेंगे और ज्यादा खरीदार मिलने से बाजार तरक्की करेगा. उन्होंने कहा, ‘इस कानून के बाद खरीददार किंग बन जाएगा.’

साथ ही उन्होंने बताया कि सलेक्ट कमेटी की सिफारिश है कि बिल्डर को 50 फीसदी पैसा बैंक में जमा करना होगा, हमने उसे 70 फीसदी किया. सिफारिश सिर्फ रेजिडेंशियल के लिए थी, हमने इसमें कमर्शियल्स को भी शामिल किया था.

ये हैं रेरा से होने वाले फायदे

– प्रोजेक्ट पूरा होने और बायर्स को पजेशन देने के पांच साल बाद तक अगर स्ट्रक्चर में कोई डिफेक्ट आता है तो उसकी जिम्मेदारी बिल्डर्स की होगी.

– बिल्डरों को बायर्स से लिया 70 फीसदी पैसा प्रोजेक्ट के अकाउंट में ही रखना होगा.

– अब निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को 3 महीने में नियामक प्राधिकरण में रजिस्टर्ड कराना होगा.

– जिन्हें कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला वो प्रोजेक्ट भी इसमें आएंगे.

– रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी प्राधिकरण के पास होगी.

– अब कारपेट एरिया पर घर बेचे जाएंगे ना कि बिल्ड-अप एरिया पर.

– कानून लागू करने वाले राज्य नियामक प्राधिकरण का गठन करेंगे.

– वायदा पूरा न करने या फिर धोखाधड़ी करने पर बिल्डर को 3 से 5 साल तक जेल हो सकती है.

– सभी राज्य में रियल एस्टेट अथॉरिटी होगी.

– साथ ही अब मकान बनाने वाला बिल्डर, डेवलेपर एक प्रॉजेक्ट का पैसा दूसरे में नहीं लगा सकता.

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