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मप्र पलायन करके मजदूरी करने गए दो युवकों की बिल्डिंग से गिरकर मौत

एंबुलेंस से शव पहुंचे गांव, छाया मातम

कटनी-  ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के ग्राम अंतर्वेद गनियारी से मजदूरी करने के लिए मुंबई गए दो युवकों की भवन निर्माण के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई। दोनों की लाश को एम्बुलेंस से गांव पहुंचाई गई। लाश पहुंचते ही पूरे गांव में मातम छा गया। हासिल जानकारी के मुताबिक अंतर्वेद गनियारी गांव निवासी विक्रम कोल 40 वर्ष और असगर उर्फ अनु मंसूरी 22 वर्ष पिछले दो वर्षों से मुंंबई में मकानों के निर्माण में श्रमिक के तौर पर काम कर रहे थे। परिजनों के मुताबिक शनिवार को काम करने के दौरान मुंबई के चैम्बुर इलाके में भवन निर्माण में मजदूरी कर रहे दोनों युवक विक्रम और असगर अचानक 11 वीं मंजिल से नीचे जा गिरे। जिससे घटनास्थल पर ही दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद चैम्बुर अस्पताल ले जाया गया जहां पर दोनों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इस दौरान आसपास काम करने वाले अंतर्वेद गांव के अन्य युवकों के द्वारा फोन पर परिजनों को सूचित किया गया। विक्रम के भाई भूरा गौटिया और असगर के भाई अल्लू मंसूरी ने बताया कि बिल्डर के द्वारा फोन पर घटना हो जाने की जानकारी दी गई थी। जिसके बाद रविवार को एम्बुलेंस से दोनों की लाश अंतर्वेद पहुंचाई गई। घटना में गांव के दो युवकों की मौत की खबर ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया। दोपहर में जब एम्बुलेंस पहुंची तो गांव के सैकड़ों लोग एकत्रित हो गए। दोपहर बाद जहां विक्रम कोल का मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया वहीं असगर मंसूरी को गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक स्थानीय तौर पर रोजगार उपलब्ध न होने के कारण क्षेत्र से अनेक युवक काम की तलाश में मुंबई में है। विक्रम और असगर भी पिछले दो वर्षों से मुंबई में मजदूरी का काम करते थे। दोनों अपने परिवार को साथ रखकर भरण पोषण  और गुजारा कर रहे थे लेकिन हादसे का शिकार हो गए। इसके पहले भी अंतर्वेद के ही 4 और लोग ऐसे ही जान गवा चुके हैं।

काम छोड़कर वापस लौटे एक दर्जन युवक

अंतर्वेद गनियारी से मजदूरी करने के लिए मुंबई गए एक दर्जन से अधिक युवक घटना से व्यथित है। एक साथ दो साथियों की मौत के बाद डरे हुए इन युवाओं ने भी काम छोड़ दिया है। सभी युवक काम छोडऩे के बाद वापस अपने गांव लौट रहे है। जिनके परिजनां का कहना है कि रोजगार की तलाश में हुई मौतों से सभी के परिवार डरे सहमे हुए है। स्थानीय तौर पर रोजगार की व्यवस्था का विकल्प तलाश जाएगा। हालांकि क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी के बीच रोजगार मिलने की आशांकाएं भी सता रही है लेकिन दूर परिजनों को भेजने में अब ग्रामीण डरने लगे हैं।

कागजों से बाहर नहीं आ सका इंडस्ट्रियल जोन

ढीमरखेड़ा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल जोन तैयार करने के लिए सरकार के द्वारा की गई घोषणा और कागजी कार्यवाही के बाद इच्छाशक्ति की कमी के कारण इंडस्ट्रियल जोन अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया। लिहाजा रोजगार मिलने की युवाओं की उम्मीदें काफूर हो चुकी है। ऐसे में तेजी से क्षेत्र के युवाओं को पलायन करना मजबूरी बन चुका है। गौरतलब है कि अधिकारियों द्वारा चिन्हित ढीमरखेड़ा देवरी बिछिया पिडराई पिपरिया अंतरवेद मुरवारी गोपालपुर सहित कई गांव का सर्वे भी कर के ऊपर पहुंचाया गया लेकिन कागजों में हुआ सर्वे अमल नहीं हो पाया है।

 

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