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तरकश के तीर

एक नई परम्परा की शुरुआत…..क्या राजनीति में यह भावना होना चाहिए…

विधायकों ने दिखाई विनम्रता…..क्योंकि फलदार वृक्ष ही झुकता है!

 

(पत्रकार-: सत्यम तिवारी की कलम से )
जबलपुर:- विधानसभा चुनाव में जीत की शानदार इबारत लिखने के बाद कांग्रेस के विधायकों ने विनम्रता की ऐसी नज़ीर पेश की है जो चर्चा का विषय बन गई है। राजतिलक के बाद कांग्रेस के विधायक बारी-बारी से अपने पराजित प्रतिद्वन्दी प्रत्याशियों और भाजपा नेताओं से सौजन्य भेंट करने उनके घर पहुंच रहे हैं। कहा भी गया है कि-
झुकता वही है जिसमें जान होती है
अकड़ तो मुर्दे की पहचान होती है
जानकारों का कहना है कि विनम्रता कांग्रेस की पारंपरिक विरासत है। अपनी इस विरासत के तहत पहल की विनय सक्सेना ने। जीतने के फौरन बाद दूसरे तीसरे दिन ही विनय अपने विनम्र भावों के साथ उत्तरमध्य विधानसभा के पूर्व विधायक और स्वास्थ्य राज्यमंत्री रहे शरद जैन के कमानिया गेट स्थित निवास पर पहुंचे। उनसे मुलाकात की। सूत्र बताते हैं कि विनय सक्सेना ने शरद जैन से कहा कि वे उनका आशीर्वाद लेने आए हैं। जीत भले ही उन्हें मिली लेकिन विधानसभा में विकास कार्य करने के लिये वे शरद जैन से भी सलाह,और मार्गदर्शन की अभिलाषा रखते हैं। इतना ही नहीं अपने विजय जुलूस के दौरान भी दमोहनाका चौराहे पर पनागर विधायक सुशील तिवारी इंदू का कार्यालय आते ही विधायक विनय अपने विजयरथ से नीचे उतर गए थे और विधायक कार्यालय पहुँचकर उन्होंने विधायक इंदू तिवारी को फूलमाला पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत किया था और फिर अनुमति लेकर ही वे अपने विजय जुलूस को लेकर रवाना हुए थे। ये सफर यहीं थमा नहीं बल्कि केबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया और तरुण भनोट के साथ विधायक विनय सक्सेना अपने साथियों,समर्थकों और पार्टी नेताओं के साथ नगर निगम भी पहुंचे। जहां तीनों ने महापौर डॉ स्वाति सदानंद गोडबोले से उनके नगर निगम स्थित बंगले पहुँचकर मुलाकात की और शहर विकास की चर्चा भी की। विपक्ष के साथ इस सहानुभूति और विनम्रता ने विजेताओं का कद जैसे और ऊपर उठा दिया है।
अफसोस कि इनसे पहले जबलपुर में अपनी जीत का परचम लहरा चुके किसी भाजपा नेता ने विनम्रता की ऐसी मिसाल पेश करने की ज़रूरत ही नहीं समझी। वे जीत के अहंकार में थे या संगठन से अनुमति नहीं थी ये कहा नहीं जा सकता। लेकिन तब से अब तक किसी भी विजयी भाजपा विधायक ने किसी कांग्रेसी नेता के घर या कार्यालय पहुँचकर भेंट करना या तो मुनासिब नहीं समझा या फिर अपनी शान के खिलाफ समझा।
अटलबिहारी जी को भी सम्मान:- कांग्रेस में अदना से लेकर आला तक लगभग सभी नेता और कार्यकर्ता भी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटलबिहारी बाजपेयी को भी बराबर सम्मान देते आये हैं उनके निधन और उसके बाद भी अनेक अवसरों पर कांग्रेस नेता श्री बाजपेयी के प्रति सम्मान और संवेदना प्रकट करते देखे सुने गए हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज में कभी किसी भाजपा नेता को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी,स्वर्गीय राजीव गांधी की सराहना करते या उनकी पुण्यतिथि पर संवेदना प्रकट करते देखा सुना नहीं जा सका। अक्सर कहा जाता है कि संस्कार व्यक्ति के हाव भाव और व्यक्तित्व से झलकते हैं जिसकी झलक कभी मोदी ग्रुप में परिलक्षित नहीं हो सकी है।

महापौर परिषद सदस्य रहे नदारत:- 3 जनवरी 2019 की दोपहर जब मध्यप्रदेश के दो नवनियुक्त केबिनेट मंत्री और एक विधायक नगर निगम पहुंचे तो उनसे मिलने या स्वागत करने के लिये महापौर परिषद (MIC) का एक भी सदस्य मौजूद नहीं था जो चर्चा का विषय रहा। नगर निगम में किसी पदाधिकारी ने आगे बढ़कर कांग्रेस के इन नए केबिनेट मंत्रियों और विधायक की अगवानी तक नहीं की। इस खास मौके पर एमआईसी सदस्यों को बुलाया ही नहीं गया या वे जानबूझकर नहीं आये इस पर संशय बना रहा लेकिन सभी ने इसे नगर सत्त्ता का सस्तापन और द्वेष जैसे शब्दों से परिभाषित ज़रूर किया।
बहरहाल भाजपा नेताओं से स्वयं उनके घर या कार्यालय पहुंचकर मुलाकात कर नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायकों ने जहाँ जीत के बाद भी अपनी विनम्रता और विराट हृदय होने का परिचय दिया है वहीं जनसामान्य की नज़रों में अपना और अपनी पार्टी की प्रतिष्ठा का परचम और ऊपर उठा दिया है। इनकी विनम्रता और उनकी बेरुखी पर देश के अज़ीम शायर राहत इंदौरी का ये शेर मुनासिब है कि-
हम अपनी जान के दुश्मन को भी अपनी जान कहते हैं
मुहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दोस्तान कहते हैं

सत्यम तिवारी✍

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