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गन कैरिज फैक्ट्री में सीबीआई की दबिश, तोप के कलपुर्जे के मामले में चल रही कारवाई ….

स्वदेशी बोफोर्स तोपों के लिए चीन में बने कलपुर्जों की आपूर्ति मेड इन जर्मनी बताकर किए जाने के मामले मे सीबीआई एक बार फिर जबलपुर पहुॅची है। सीबीआई की टीम ने जीसीएफ फैक्ट्री मे दबिष देते हुए खरीदी से जुड़े कई अहम दस्तावेज और उपकरणो को सीज़ किया है। सीबीआई की टीम ने धनुष तोप मे की गई बेयरिंग की खरीदी प्रक्रिया से जुडे जूनियर वकर््स मैनेजर एस सी खपुआ के दफ्तर और आवास भी पहुॅची और कम्पयुटी को जप्त किया और उनके बयान भी दर्ज किए। धपुष तापो मे चीनी कलपुर्जाे का मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने दिल्ली की सिद्ध सेल्स सिंडीकेट कंपनी समेत अज्ञात अधिकारियो के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी । ये दूसरा मौका होगा जब सीबीआई की टीम जबलपुर पहुॅची है।

क्या था पूरा मामला …….

2017 मे सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली की सिद्ध सेल्स सिंडिकेट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की । साथ ही जांच एजेंसी ने जबलपुर की गन कैरिज फैक्टरी (जीसीएफ) के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर जाँच शुरु कर दी । मामला उजागर होने के बाद 2 दिनो तक जबलपुर मे सीबीआई की टीम ने कई अधिकारियो से पूछताछ की वही धनुष सेक्षन की फाइल नंबर 13 एफ 003 को जप्त कर लिया है।  हम आपको बता दे कि धनुष बोफोर्स तोप का स्वदेशी संस्करण है……सूत्रो की माने तो जांच एजेंसी ने प्राथमिकी में कहा कि जीसीएफ के अज्ञात अधिकारियों ने चीन में बने वायर रेस रोलर बियरिंग्स को जर्मनी मेड बताकर खरीद लिया। इसकी आपूर्ति सिद्ध सेल्स सिंडिकेट की ओर से सीआरबी-मेड इन जर्मनी के तौर पर की गई थी ऐसी चार बियरिंग के लिए निविदा जारी की गई और वर्ष 2013 में 35.38 लाख रुपए मूल्य का ऑर्डर सिद्ध सेल्स सिंडिकेट को दिया गया इसके बाद 7 अगस्त 2014 को ऑर्डर बढ़ाकर छह बियरिंग का कर दिया गया जिसका मूल्य 53.07 लाख रुपए हो गया। कंपनी ने 7 अप्रैल 2014 और 12 अगस्त 2014 के बीच तीन मौकों पर दो-दो बियरिंग की आपूर्ति की गई। सीबीआई ने कहा कि धनुष तोप का उत्पादन और प्रदर्शन भारत की रक्षा तैयारियों के अत्यंत ही महत्वपूर्ण है और वायर रेस रोलर बियरिंग इस तोप का अहम उपकरण है। सीबीआई को मिली जानकारी के अनुसार जर्मनी की कंपनी वायर रेस रोलर बियरिंग नहीं बनाती है। सिद्ध सेल्स सिंडिकेट ने इन्हें चीन में हेनान स्थित कंपनी साइनो यूनाइटेड इंडस्ट्रीज लि. से हासिल किया। सीबीआई ने चीन और सिद्ध सेल्स सिंडिकेट के बीच आदान-प्रदान किए गए कई ईमेल भी पकड़े ं। सिद्ध सेल्स ने जर्मनी की कंपनी से प्राप्त जो पत्र दिखाया है वह भी फर्जी है। जर्मनी से मिला प्रमाण-पत्र भी फर्जी है………..दिल्ली की सिद्ध सेल्स सिंड़िकेट कंपनी के साथ मिलकर जी सी एफ फैक्ट्री के अधिकारीयो ने जिस तरह से देश को धोखा दिया है उसकी चैतरफा निंदा हुई।

 

 

 

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