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अनियमितताओं से भरी जबलपुर मेट्रो बस सेवा

प्रशासन की मूक सहमती

शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो बस जब शुरू हुई थी तो कई प्रकार की सुविधा के साथ कई वादे भी किए गए थे परंतु जैसे जैसे समय बीतता गया इस को संचालित करने वाले संचालकों ने मनमानीयों की हदें पार कर दी और यह सब इसलिए नहीं कि वह निरंकुश है,  यह इसलिए कि उनके ऊपर किसी का अंकुश नहीं है | फोटो खिंचा कर जन सुविधा का ढिंढोरा पीटने वाली महापौर और निगम के कर्तव्यनिष्ठ कर्मठ अधिकारी या यूं कहें जिला प्रशासन के भी अधिकारी कितने जागरूक हैं यह वर्तमान में मेट्रो बसों की दुर्दशा बताती है विभिन्न  रूट्स  पर चलने वाली मेट्रो को जन सुविधाओं से परिपूर्ण होना चाहिए वह सुविधायें  तो दूर उल्टा सवारियों की जान सांसत में बना कर रखती है पिछले दिनों घटित हुई राष्ट्रीय स्तर की घटनाओं को लेकर शहर में भी मेट्रो बस में सवारियों की सुरक्षा को लेकर प्रपोगंडा किया गया जिसमें कि बसों में कैमरे लगाने की भी बात हुई थी परंतु कई बसों में कैमरे आज भी नदारद हैं और जिनमे हैं अभी वे या तो बंद है या कंडम कंडीशन में है पिछले दिनों सवारियों की सुरक्षा को लेकर हुई कुछ घटनाएँ  है इस बात पर भी सवालिया निशान लगाती है कि संचालकों को भी क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है !

मेडिकल रोड पर विगत समय हुई एक पैरामेडिकल की छात्रा के साथ हुई घटना हो या धनवंतरी नगर क्षेत्र में घटित एक महिला यात्री के साथ हुई घटना हो | इस बात का सबूत है कि  मेट्रो बसों के ड्राइवर और कंडक्टर कितने चरित्रवान हैं | ड्राइवर कंडक्टर को रखते समय ना ही इनका पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाता है और ना ही इनका  नशे से सम्बंधित मेडिकल टेस्ट किया जाता है यानी की कुल मिलाकर यात्रियों की जान भगवान भरोसे रहती है एक और बात जो जनता के या यूं कहें कि गरीब जनता जो कि रोज के आने जाने वाले होते हैं कि जेब से जुड़ी हुई है बसों के किराए में गाइडलाइन के अनुसार किलोमीटर दर्शा दिए गए कि फला किलोमीटर से फला किलोमीटर तक कितना रुपए परंतु उसके बाद भी सवारियों से अतिरिक्त वसूली करना तो शगल में है देखा जाए तो जो मेट्रो बस का टिकट दिया जाता है उसमें रूपये  तो अंकित होते हैं परंतु जो स्थान है वह कितने किलोमीटर पर है यह बात उसमें अंकित नहीं होती जिससे सवारियों से मनमाना रुपए लिया जाता है इसी तरह शास्त्री ब्रिज चौराहा जो कि ब्लूम चौक कहलाता है मेट्रो बस के रूट में ही नहीं आता शास्त्री ब्रिज से बैठने वाली सवारी को उल्लेखित नहीं किया जाता या यूं कहें ग्वारीघाट से या मेडिकल से या तिलवारा  से आने वाली सवारिया शास्त्रीब्रिज चौराहा के नाम पर टिकट नहीं ले सकते उनको छोटी लाइन फाटक बताया जाता है क्योंकि इनके सिस्टम में यह फीड ही नहीं है मेट्रो बस सेवा भोपाल इंदौर आदि शहरों की तुलना मैं जब भी जबलपुर की तुलना की जाए तो कमियों की परत सिलसिलेवार खुलती चली जाएगी |

महिलाओं के नाम पर पिंक बसें चलाने वाली महापौर और खोखली वाह वाही लूटने वाले अधिकारी इस शहर में मेट्रो संचालकों से संगामित्ति कर जनता को लुटने के लिए छोड़ चुके हैं |

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